सावन के महीने में गंगा का पवित्र जल कावड़ में क्यों लाया जाता है?-Why is the holy water of the Ganges brought to Kavad in the month of Sawan?



ये कथा उस समय की है जब माता सती ने शिव को पाने के लिए दूसरा जन्म पार्वती के रूप में लिया!. माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए प्रेम और भक्ति का मार्ग़ अपनाया!
एक समय माता पार्वती को देव ऋषि नारद ने अपने हाथो से मिटटी का शिवलिंग बनाने के लिए कहा जब माता पार्वती ने मिटटी का शिवलिंग बनाया !
माता पार्वती ने शिवलिंग में जल चढ़ाने के लिए जल को मानसरोवर से लेकर आना उचित समझा, उस समय पृय्वी पर गंगा नदी नही बहती थी . तभी माता पार्वती के पिता हिमनरेश ने अपने धनुष के दोनों और मिटटी के बर्तन को बाधकर उनके के लिए कावड़ बनायीं.
उस कावड़ में माता पार्वती शिव के लिए जल लेने चले गयी. तब शिव जी ने उनकी परीक्षा लेने के लिए एक राजा का अवतार लिए और उन्हें रस्ते में मिले और कहा की तुम कहा जा रही हो. तभी माता पार्वती ने कहा में अपने स्वामी के स्नान के लिए मान सरोवर से पवित्र जल लेने जा रही हू. तभी राजा रूप में महादेव ने अपना ही अपमान किया और कहा की तुम्हारे स्वामी इतने अपवित्र है की उनको स्नान करने के लिए अपवित्र जल की जरुरत पढ़े , तभी माता पार्वती ने कहा की मेरे स्वामी तो बहुत पवित्र है मुझे ये भय है क़ि मेरे कारण वो अपवित्र न हो जाए. इसलिए जो जल में लेने जा रही हु उस से पहले में स्नान करुँगी उस के बाद महादेव को जल अर्पित करुँगी . इस से माता पार्वती क़ि परीक्षा सफल हुई .
तभी से शिव भगत शिव क़ि भक्ति पाने के लिए कावड़ ले कर आने लगे. और जिस दिन जल शिवजी को अर्पित क्या जाता है उस दिन ये दिन शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है इस कावड़ को सावन के महीने में लाया जाता है . भविष्य में गंगा नदी शिव के बरदान से सबसे पवित्र मानी गयी. अब शिव को सभी लोग गंगा का जल अर्पित करते है.

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