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Showing posts with the label नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

श्रीदुर्गा अष्टोत्तरशत नामावलि

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श्रीदुर्गा अष्टोत्तरशत नामावलि श्री दुर्गा अष्टोत्तर शत नामावलि – 108 Names of Maa Durga ॐ श्रियै नमः ॐ उमायै नमः ॐ भारत्यै नमः ॐ भद्रायै नमः ॐ शर्वाण्यै नमः ॐ विजयायै नमः ॐ जयायै नमः ॐ वाण्यै नमः ॐ सर्वगतायै नमः ॐ गौर्यै नमः ॐ वाराह्यै नमः ॐ कमलप्रियायै नमः ॐ सरस्वत्यै नमः ॐ कमलायै नमः ॐ मायायै नमः ॐ मातंग्यै नमः ॐ अपरायै नमः ॐ अजायै नमः ॐ शांकभर्यै नमः ॐ शिवायै नमः ॐ चण्डयै नमः ॐ कुण्डल्यै नमः ॐ वैष्णव्यै नमः ॐ क्रियायै नमः ॐ श्रियै नमः ॐ ऐन्द्रयै नमः ॐ मधुमत्यै नमः ॐ गिरिजायै नमः ॐ सुभगायै नमः ॐ अंबिकायै नमः ॐ तारायै नमः ॐ पद्मावत्यै नमः ॐ हंसायै नमः ॐ पद्मनाभसहोदर्यै नमः ॐ अपर्णायै नमः ॐ ललितायै नमः ॐ धात्र्यै नमः ॐ कुमार्यै नमः ॐ शिखवाहिन्यै नमः ॐ शांभव्यै नमः ॐ सुमुख्यै नमः ॐ मैत्र्यै नमः ॐ त्रिनेत्रायै नमः ॐ विश्वरूपिण्यै नमः ॐ आर्यायै नमः ॐ मृडान्यै नमः ॐ हींकार्यै नमः ॐ क्रोधिन्यै नमः ॐ सुदिनायै नमः ॐ अचलायै नमः ॐ सूक्ष्मायै नमः ॐ परात्परायै नमः ॐ शोभायै नमः ॐ सर्ववर्णायै नमः ॐ हरप्रियायै नमः ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॐ महासिद्धयै नमः ॐ स्वधायै नमः ॐ स्वाहायै नमः ॐ मनोन्मन्यै नमः ॐ त...

Duga Saptasahati दुर्गा सप्तशती

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दुर्गा सप्तशती     प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री   द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी   तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री   दुर्गा सप्तशती पाठ विधि:- नवरात्र घट स्थापना (ऐच्छिक):- नवरात्र का श्रीगणेश शुक्ल पतिपदा को प्रात:काल के शुभमहूर्त में घट स्थापना से होता है। घट स्थापना हेतु मिट्टी अथवा साधना के अनुकूल धातु का कलश लेकर उसमे पूर्ण रूप से जल एवं गंगाजल भर कर कलश के उपर (मुँह पर) नारियल(छिलका युक्त) को लाल वस्त्र/चुनरी से लपेट कर अशोक वृक्ष या आम के पाँच पत्तो सहित रखना चाहिए। पवित्र मिट्टी में जौ के दाने तथा जल मिलाकर वेदिका का निर्माण के पश्चात उसके उपर कलश स्थापित करें। स्थापित घटपर वरूण देव का आह्वान कर पूजन सम्पन्न करना चाहिए। फिर रोली से स्वास्तिकबनाकर अक्षत एवं पुष्प अर्पण करना चाहिए। कुल्हड़ में जौ बोना(ऐच्छिक):- नवरात्र के अवसर पर नवरात्रि करने वाले व्यक्ति विशेष शुद्ध मिट्टी म...

नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री (Maa Siddhidaatri) नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

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नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री (Maa Siddhidaatri) “सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि। सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥“ श्री दुर्गा   का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नवम दिन इनकी पूजा औरआराधना की जाती है। सिद्धिदात्रीकी कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मार्कण्डेयपुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धियाँ बतलायी गयी है। भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धियाँ अपने उपासको को प्रदान करती है। माँ दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की आराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का   समापन हो जाता है। इस दिन को रामनवमी भी कहा जाता है और शारदीय नवरात्रि के अगले दिन अर्थात दसवें दिन को रावण पर राम की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशम् तिथि को बुराई पर अच्छाकई की विजय का प्रतीक माना जाने वाला त्योतहार विजया दशमी यानि दशहरा मनाया जाता है। इस दिन रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले जलाये जाते हैं।  दुर्गा पूज...

अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी (Maa Mahagauri) नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

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अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी (Maa Mahagauri) “श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥“ श्री दुर्गा   का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन किया जाता है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। माँ महागौरीकी आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हों। दुर्गा पूजा नवरात्री अष्टमी पूजा - अष्टमी तिथि महागौरी की पूजा देवी दुर्गा के नौ रूपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं. दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. महागौरी आदी शक्ति हैं इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी हैम माँ महागौरी की अराधना से भक्तों को सभी कष्ट दूर हो जाते हैंतथा देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है.दुर्गा सप्तशती (Durga Saptsati) में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्...

सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि (Maa Kaalratri) नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

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सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि (Maa Kaalratri) “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥“ श्री दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए। संसार में कालो का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के   उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं। दुर्गा पूजा का सातवां दिन – आश्विन शुक्ल सप्तमी – कालरात्रि पूजा मां दुर्गा के सातवें स्वरूप या शक्ति को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सातवें दिन माँ काल रात्रि की उपासना का विधान है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका वर्ण अंधकार की भाँतिकाला है, केश बिखरे हुए हैं, कंठ में विद्युत की चमक वाली माला है, माँ कालरात्रि के त...

पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता (Maa Skandamata) नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

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पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता (Maa Skandamata) “सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥“ श्री दुर्गा   का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। इनकी आराधनासे मनुष्य सुख-शांति की प्राप्ति करता है। सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित दो हाथो वाली यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है। नवरात्री दुर्गा पूजा पंचमी तिथि – स्कंदमाता की पूजा माँ दुर्गा का पंचम रूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है. भगवान स्कन्द कुमार (कार्तिकेय)की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है. भगवान स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुध्द चक्र में अवस्थित होता है. स्कन्द   मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकडे हैं और दाहि...

षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी (Maa Katyayani) नवरात्र-दुर्गापूजा (Special Navratri Vrat Katha)

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षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी (Maa Katyayani) “चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥“ श्री दुर्गाका षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। इनकी आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम होता है। चन्द्रहास नामक तलवार के प्रभाव से जिनका हाथ चमक रहा है, श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी कल्यान करें। नवरात्री दुर्गा पूजा छठा तिथि – माता कात्यायनी की पूजा : माँ दुर्गा के छठे रूप को माँ कात्यायनी के नाम से पूजा जाता है. महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा गया.देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है, माँ कात्यायनी...