Posts

Showing posts with the label आरती संग्रह

Bagalamukhi Mantra and Aarti-बगलामुखी मंत्र और आरती,

Image
बगलामुखी मंत्र और आरती, इनके प्रभाव से मिलती है दुश्मनों पर जीत और कोर्ट केस में सफलता बगलामुखी देवी ब्रहमांड की दस सर्वश्रेष्ठ शक्तियों में से एक है। ये दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। ये कलयुग की अधिष्ठात्री देवी हैं। कलयुग में इनकी पूजा करने से तुरंत फल मिलता है। बगलामुखी देवी इस ब्रहमांड की स्तम्भन शक्ति हैं। इनकी पूजा दुश्मनों पर जीत हासिल करने के लिए की जाती है। खासतौर से कोर्ट-कचहरी और पुलिस के मामलों में उलझे निर्दोष लोग बगलामुखी देवी के मंत्र जपकर परेशानियाें से मुक्त हो सकते हैं। ये है बगलामुखी मंत्र - “ ऊं ह्ललीं बगलामुखीं सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्ललीं ऊं स्वाहा ” इस मंत्र का जप करने से अचानक परेशानियां नहीं आती है और हार का सामना भी नहीं करना पड़ता। इस मंत्र का जप करने वाले लोगों की कोशिश बेकार नहीं जाती। जल्दी ही सफलता मिलती है। वहीं झूठे इस मंत्र के प्रभाव से झूठे आरोप में कोर्ट केस में फंसे लोगों को दुश्मनों पर जीत मिलती है। ऐसे लोगों को दुश्मन भी परेशान नहीं करते। बगलामुख...

Aarti of Lord Shani-शनि देव जी की आरती

Image
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनि देव.... श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी। नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय जय श्री शनि देव.... क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय जय श्री शनि देव.... मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय जय श्री शनि देव.... देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥ जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

Aarti of Jupiter Dev ji-बृहस्पति देव जी की आरती

Image
ॐ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा। छिन-छिन भोग लगाऊं, कदली फल मेवा।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता। सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े। प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी। पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो। विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी।। ॐ जय बृहस्पति देवा।। जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे। जेष्टानंद बंद सो-सो निश्चय पावे।। ॐ जय बृहस्पति देवा।।

Aarti of Shri Suryanarayan ji-श्री सूर्यनारायण जी की आरती

Image
जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव | रजनीपति मदहारी, शतदल जीवनदाता | षटपत मन मुदकारी, हे दिनमणि ! ताता | जग के हे रविदेव,जय जय जय रविदेव नभमण्डल के वासी,ज्योति प्रकाशक देवा | निज जनहित सुखरासी, तेरी हमसब सेवा | करते हैं रविदेव, जय जय जय रविदेव | कनक बदन मन मोहित, रुचिर प्रभा प्यारी | निज मंडल से मंडित, अजर अमर छविधारी हे सुरवर रविदेव जय जय जय रविदेव

Aarti of Shri Radha ji-श्री राधा जी की आरती

Image
आरती श्री वृषभानुसुता की | मंजु मूर्ति मोहन ममताकी || टेक || त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि | पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की || मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरती सोहनि | अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिताकी || संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी, आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी, अति अमूल्य सम्पति समता की || कृष्णात्मिका, कृषण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि | जगज्जननि जग दुःखनिवारिणि, आदि अनादिशक्ति विभुताकी ||

Aarti of Shri Ravidas Ji -श्री रविदास जी की आरती

Image
नामु तेरो आरती भजनु मुरारे | हरि के नाम बिनु झूठे सगल पसारे || रहउ० नाम तेरा आसानी नाम तेरा उरसा, नाम तेरा केसरो ले छिटकारे | नाम तेरा अंभुला नाम तेरा चंदनोघसि, जपे नाम ले तुझहि कउ चारे | नाम तेरा दीवा नाम तेरो बाती, नाम तेरो तेल ले माहि पसारे | नाम तेरे की जोति जलाई, भइओ उजिआरो भवन समलारे | नाम तेरो तागा नाम फूल माला, भार अठारह सगल जुठारे | तेरो किया तुझही किया अरपउ, नामु तेरा तुही चंवर ढोलारे | दस अठा अठसठे चार खाणी, इहै वरतणि है संगल संसारे | कहै रविदास नाम तेरो आरती, सतिनाम है हरि भोग तुम्हारे |

Aarti of Shri Shakumbhari Devi-श्री शाकुंभारी देवी जी की आरती

Image
ऐसा अदभुत रूप हृदय धर लीजो शताक्षी दयालु की आरती कीजो | तुम परिपूर्ण आदि भवानी मां सब घट तुम आप बखानी मां शाकुम्भर अंबा जी की आरती कीजो तुम्हीं हो शाकुम्भरी, तुम ही हो शताक्षी मां शिव मूर्ति माया तुम ही हो प्रकाशी मां श्री शाकुम्भर नित जो नर नारी अंबे आरती गावे मां इच्छा पूरणकीजो, शाकुम्भरी दर्शन पावे मां श्री शाकुम्भर जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ जो नर आरती सुने सुनावे माँ बसे बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावे, श्री शाकुम्भर

Aarti of Shri Tulsi ji-श्री तुलसी जी की आरती

Image
जय जय तुलसी  माता, सबकी सुखदाता वर माता | सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर, रज से रक्षा करके भव त्राता | बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या, विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे सो नर तर जाता | हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित, पतित जनों की तारिणि तुम हो विख्याता | लेकर जन्म बिजन में, आई दिव्य भवन में, मानव लोक तुम्हीं से सुख संपति पाता | हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी, प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता | जय जय तुलसी माता |

श्री सालासर बालाजी की आरती (हनुमान) – Shri Salasar Balaji Ki Aarti (Hanuman)

Image
श्री सालासर बालाजी की आरती  जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर वाला | टेक | चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन ख़ुशी मन में | प्रकट भय सुर वानर तन में, विदित यस विक्रम त्रिभुवन में | दूध पीवत स्तन मात के, नजर गई नभ ओर | तब जननी की गोद से पहुंचे, उदयाचल पर भोर | अरुण फल लखि रवि मुख डाला || कृपा कर० || १ || तिमिर भूमण्डल में छाई, चिबुक पर इन्द्र बज बाए | तभी से हनुमत कहलाए, द्वय हनुमान नाम पाये | उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास | इधर हो गयो अन्धकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास | भये ब्रह्मादिक बेहाला || कृपा कर || २ || देव सब आये तुम्हारे आगे, सकल मिल विनय करन लागे | पवन कू भी लाए सागे, क्रोध सब पवन तना भागे | सभी देवता वर दियो, अरज करी कर जोड़ | सुनके सबकी अरज गरज, लखि दिया रवि को छोड़ | हो गया जगमें उजियाला || कृपा कर || ३ || रहे सुग्रीव पास जाई, आ गये बनमें रघुराई | हरिरावणसीतामाई, विकलफिरतेदोनों भाई | विप्ररूप धरि राम को, कहा आप सब हाल | कपि पति से करवाई मित्रता, मार दिया कपि बाल | दुःख सुग्रीव तना टाला || कृपा कर || ४ || आज्ञा ले रघुपति की धाया, लंक में सिन्धु लाँघ आया | हाल...

श्रीमद् भागवत पुराण की आरती – Shrimad Bhagwat Pura Ki Aarti

Image
श्रीमद् भागवत पुराण की आरती  आरती अतिपावन पुराण की | धर्म – भक्ति – विज्ञान – खान की || टेक || महापुराण भागवत निर्मल | शुक-मुख-विगलित निगम-कल्ह-फल || परमानन्द-सुधा रसमय फल | लीला रति रस रसिनधान की || आरती० कलिमल मथनि त्रिताप निवारिणी | जन्म मृत्युमय भव भयहारिणी || सेवत सतत सकल सुखकारिणी | सुमहैषधि हरि चरित गान की || आरती० विषय विलास विमोह विनाशिनी | विमल विराग विवेक विनाशिनी || भागवत तत्व रहस्य प्रकाशिनी | परम ज्योति परमात्मा ज्ञान को || आरती० परमहंस मुनि मन उल्लासिनी | रसिक ह्रदय रस रास विलासिनी || भुक्ति मुक्ति रति प्रेम सुदासिनी | कथा अकिंचन प्रिय सुजान की || आरती०

Aarti of Shri Naina Devi-श्री नैना देवी जी की आरती

Image
तेरा अदभुत रूप निराला, आजा! मेरी नैना माई ए | तुझपै तन मन धन सब वारूं, आजा मेरी नैना माई ए || सुन्दर भवन बनाया तेरा, तेरी शोभा न्यारी | नीके नीके खम्भे लागे, अद्-भुत चित्तर करी तेरा रंग बिरंगा द्वारा || आजा झाँझा और मिरदंगा बाजे, और बाजे शहनाई | तुरई नगाड़ा ढोलक बाजे, तबला शब्त सुनाई | तेरे द्वारे नौबत बाजे || आजा पीला चोला जरद किनारी, लाल ध्वजा फहराये | सिर लालों दा मुकुट विराजे, निगाह नहिं ठहराये | तेरा रूप न वरना जाए || आजा पान सुपारी ध्वजा, नारियल भेंट तिहारी लागे | बालक बूढ़े नर नारी की, भीड़ खड़ी तेरे आगे | तेरी जय जयकार मनावे || आजा कोई गाए कोई बजाए, कोई ध्यान लगाये | कोई बैठा तेरे आंगन में, नाम की टेर सुनाये | कोई नृत्य करे तेरे आगे || आजा कोई मांगे बेटा बेटी, किसी को कंचन माया | कोई माँगे जीवन साथी, कोई सुन्दर काया | भक्तों किरपा तेरी मांगे || आजा

Aarti Sai Baba Ji ki-आरती साईं बाबा जी की

Image
ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे। भक्तजनों के कारण, उनके कष्ट निवारण॥ शिरडी में अवतरे, ॐ जय साईं हरे॥ ॐ जय...॥ दुखियन के सब कष्टन काजे, शिरडी में प्रभु आप विराजे। फूलों की गल माला राजे, कफनी, शैला सुन्दर साजे॥ कारज सब के करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ काकड़ आरत भक्तन गावें, गुरु शयन को चावड़ी जावें। सब रोगों को उदी भगावे, गुरु फकीरा हमको भावे॥ भक्तन भक्ति करें, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ हिन्दु मुस्लिम सिक्ख इसाईं, बौद्ध जैन सब भाई भाई। रक्षा करते बाबा साईं, शरण गहे जब द्वारिकामाई॥ अविरल धूनि जरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ भक्तों में प्रिय शामा भावे, हेमडजी से चरित लिखावे। गुरुवार की संध्या आवे, शिव, साईं के दोहे गावे॥ अंखियन प्रेम झरे, ॐ जय साईं हरे ॥ ॐ जय...॥ ॐ जय साईं हरे, बाबा शिरडी साईं हरे। शिरडी साईं हरे, बाबा ॐ जय साईं हरे॥

Aarti of Baba Balak Nath Ji-बाबा बालक नाथ जी की आरती

Image
ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे, भक्त जनों की नैया, दस जनों की नैया, भव से पार करे, ॐ जय कलाधारी हरे ॥ बालक उमर सुहानी, नाम बालक नाथा, अमर हुए शंकर से, सुन के अमर गाथा । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ शीश पे बाल सुनैहरी, गले रुद्राक्षी माला, हाथ में झोली चिमटा, आसन मृगशाला । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ सुंदर सेली सिंगी, वैरागन सोहे, गऊ पालक रखवालक, भगतन मन मोहे । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ अंग भभूत रमाई, मूर्ति प्रभु रंगी, भय भज्जन दुःख नाशक, भरथरी के संगी । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ रोट चढ़त रविवार को, फल, फूल मिश्री मेवा, धुप दीप कुदनुं से, आनंद सिद्ध देवा । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ भक्तन हित अवतार लियो, प्रभु देख के कल्लू काला, दुष्ट दमन शत्रुहन, सबके प्रतिपाला । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ श्री बालक नाथ जी की आरती, जो कोई नित गावे, कहते है सेवक तेरे, मन वाच्छित फल पावे । ॐ जय कलाधारी हरे ॥ ॐ जय कलाधारी हरे, स्वामी जय पौणाहारी हरे, भक्त जनों की नैया, भव से पार करे, ॐ जय कलाधारी हरे ॥

Aarti of Goddess Vaishno Devi-माता वैष्णो देवी जी की आरती

Image
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता । हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी । गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे । सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे । बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे । ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा । दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे । उसकी इच्छा पूरण, माता हो जावे ॥ ॥ जय वैष्णवी माता...॥ इतनी स्तुति निश-दिन, जो नर भी गावे । कहते सेवक ध्यानू, सुख सम्पत्ति पावे ॥ जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता । हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता ॥

Aarti of Shri Mansa Devi-श्री मनसा देवी की आरती

Image
जय मनसा माता श्री जय मनसा माता जो नर तुमको ध्याता, जो नर मैया जी को ध्याता मन वांछित फल पाता| जय मनसा माता| जरत्कारू मुनि पत्नी, तुम वासुकि भगिनी मैया तुम वासुकि भगिनी कश्यप की तुम कन्या आस्तीक की माता| सुरनर मुनिगण ध्यावत, सेवत नरनारी मैया सेवत नर नारी गर्व धन्वन्तरी नाशिनी, हंस वाहिनी देवी जय नागेश्वरी माता| जय मनसा माता| पर्वतवासिनी संकट नाशिनी, अक्षय धन दात्री| मैया अक्षय धनदात्री पुत्र पौत्रदायिनी माता, पुत्र पौत्रदायिनी माता मन इच्छा फल दाता| जय मनसा माता| मनसा जी की आरती जो कोई नर गाता मैया जो नर नित गाता कहत शिवानन्द स्वामी, रटत हरिहर स्वामी सुख सम्पति पाता| जय मनसा माता|

Aarti Kunj Bihari Ji's / Aarti Krishna Ji's-आरती कुंज बिहारी जी की/ आरती कृष्ण जी की

Image
आरती कुँज बिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गले में वैजन्ती माला, बजावे मुरली मधुर बाला, श्रवण में कुण्डल झलकाला, नन्द के नन्द, श्री आनन्द कन्द, मोहन बॄज चन्द राधिका रमण बिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ गगन सम अंग कान्ति काली, राधिका चमक रही आली, लसन में ठाड़े वनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चन्द्र सी झलक ललित छवि श्यामा प्यारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ जहाँ से प्रगट भयी गंगा, कलुष कलि हारिणि श्री गंगा, स्मरण से होत मोह भंगा, बसी शिव शीश, जटा के बीच, हरे अघ कीच चरण छवि श्री बनवारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसै, गगन सों सुमन राशि बरसै, अजेमुरचन मधुर मृदंग मालिनि संग अतुल रति गोप कुमारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ चमकती उज्ज्वल तट रेणु, बज रही बृन्दावन वेणु, चहुँ दिसि गोपि काल धेनु, कसक मृद मंग, चाँदनि चन्द, खटक भव भन्ज टेर सुन दीन भिखारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥ 

आरती माँ लक्ष्मी जी की-Aarti Maa Lakshmi ji

Image
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही हो जग-माता । सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ दुर्गा रुप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता । जो को‌ई तुमको ध्यावत, ऋद्घि-सिद्घि धन पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ तुम पाताल बसंती, तुम ही शुभदाता । कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ जिस घर में तुम रहती, सब सद्‍गुण आता । सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न को‌ई पाता । खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ शुभ-गुण मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता । रत्‍न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता ॥ श्री महालक्ष्मीजी की आरती, जो को‌ई नर गाता । उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता ॥

Aarti of Goddess Parvati-माता पार्वती जी की आरती

Image
जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। सृष्ट‍ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। देवन अरज करत हम चित को लाता गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय पार्वती माता जय पार्वती माता। श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता सदा सुखी रहता सुख संपति पाता। जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।

Aarti of Shri Saraswati Maa-श्री सरस्वती माँ की आरती

Image
श्री सरस्वती मां की आरती  आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। जाकी कृपा कुमति मिट जाए, सुमिरन करत सुमति गति आये। शुक सनकादिक जासु गुण गाये, वाणि रूप अनादि शक्ति की। आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। नाम जपत भ्रम छूट दिये के, दिव्य दृष्टि शिशु उधर हिय के। मिलहिं दर्श पावन सिय पिय के, उड़ाई सुरभि युग-युग, कीर्ति की। आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। रचित जासु बल वेद पुराणा, जेते ग्रन्थ रचित जगनाना। तालु छन्द स्वर मिश्रित गाना, जो आधार कवि यति सती की। आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की। सरस्वती की वीणा-वाणी कला जननि की।आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।।

Shri Ram Chandra Ji Ki Aarti-श्री राम चंद्र जी की आरती

Image
श्री राम चन्द्र कृपालु भज मन, हरन भवभय दरुणम, नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजरुनम। कंदर्प अग्नित अमित छवी नवनील नीरज सुंदरम, पटपेत मनहुदित रुचिसुचि नोमी जनक सुतवारम। भजु दीनबंधु दिनेश दानव दतिया वंश निकंदनम, रघुनंद आनंद कांड कोशल चंद दशरथ नंदनाम। सर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदर अंगवी भूषणम, अजानुभु सर चाप धर संग्राम जित खर दुशानम। इति वदते तुलसी दास शंकर शीश मुनिमन रंजनम, मम ह्रीं कंजनिवास कुरुकमादी खलदल गंजनाम्। मन जहि रंचायो मिलिहि सो वार सहज सुंदर सांवरो, करुना निधान सुजान शैल स्नेह जनत रावरो। एहिभांति गौरी आशिष सुनसि साहित हिय अर्शित अली, तुलसी भवानी पूजि पुनि पुनि मुदित मनमंदिर चली। जानि गौरी अनुकुल, सियहिया हर्ष न जात कहि,   मंजुल मंगल मूल, बम अंग फड़कन लागे।