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Showing posts with the label Nav Durga Aarti

Maa Mahagauri ji ki Aarti

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जय महागौरी जगत की माया जय उमा भवानी जय महामाया हरिद्वार कनखल के पासा महागौरी तेरा वहा निवास चंदेर्काली और ममता अम्बे जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे भीमा देवी विमला माता कोशकी देवी जग विखियाता हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया उसी धुएं ने रूप काली बनाया बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया तभी माँ ने महागौरी नाम पाया शरण आने वाले का संकट मिटाया शनिवार को तेरी पूजा जो करता माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता 'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो

Maa Siddhidatri ji ki Aarti

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जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता तू भक्तो की रक्षक  तू दासो की माता तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि, तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि  !! कठिन  काम  सिद्ध  कराती  हो  तुम , जभी  हाथ  सेवक  के  सर  धरती  हो  तुम  !! तेरी  पूजा  मैं  तो  न  कोई  विधि  है , तू  जगदम्बें  दाती  तू  सर्वसिद्धि  है  !! रविवार  को  तेरा  सुमरिन  करे  जो , तेरी  मूर्ति  को  ही  मन  मैं  धरे  जो  !! तू  सब  काज  उसके  कराती  हो  पूरे , कभी  काम  उस  के  रहे  न  अधूरे  !! तुम्हारी  दया  और  तुम्हारी  यह  माया , रखे  जिसके  सर  पैर  मैया  अपनी  छाया !! सर्व  सिद्धि  दाती  वो  है  भागयशाली , जो  है  तेरे  दर  का  ही  अम्बें  सवाली...

Mata Kaalratri ji Ki Aarti

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कालरात्रि जय जय महाकाली काल के मुह से बचाने वाली दुष्ट संगारण नाम तुम्हारा महा चंडी तेरा अवतारा पृथ्वी और आकाश पे सारा महाकाली है तेरा पसारा खंडा खप्पर रखने वाली दुष्टों का लहू चखने वाली कलकता स्थान तुम्हारा सब जगह देखू तेरा नजारा सभी देवता सब नर नारी गावे स्तुति सभी तुम्हारी रक्तदन्ता और अन्न पूर्णा कृपा करे तो कोई भी दुःख ना ना कोई चिंता रहे ना बिमारी ना कोई गम ना संकट भारी उस पर कभी कष्ट ना आवे महाकाली माँ जिसे बचावे तू भी 'चमन' प्रेम से कह कालरात्रि माँ तेरी जय

Maa Katyayani ji ki Aarti

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जय जय अम्बे जय कात्यानी जय जगमाता जग की महारानी बैजनाथ स्थान तुम्हारा वहा वरदाती नाम पुकारा कई नाम है कई धाम है यह स्थान भी तो सुखधाम है हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी कही योगेश्वरी महिमा न्यारी हर जगह उत्सव होते रहते हर मंदिर में भगत है कहते कत्यानी रक्षक काया की ग्रंथि काटे मोह माया की झूठे मोह से छुडाने वाली अपना नाम जपाने वाली ब्रेह्स्पतिवार को पूजा करिए ध्यान कात्यानी का धरिये हर संकट को दूर करेगी भंडारे भरपूर करेगी जो भी माँ को 'चमन' पुकारे कात्यानी सब कष्ट निवारे

Mata Skandmata ji ki Aarti

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Mata Skandmata ji ki Aarti जय तेरी हो अस्कंध माता पांचवा नाम तुम्हारा आता सब के मन की जानन हारी जग जननी सब की महतारी तेरी ज्योत जलाता रहू मै हरदम तुम्हे ध्याता रहू मै कई नामो से तुझे पुकारा मुझे एक है तेरा सहारा कही पहाड़ो पर है डेरा कई शेहरो मै तेरा बसेरा हर मंदिर मै तेरे नजारे गुण गाये तेरे भगत प्यारे भगति अपनी मुझे दिला दो शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो इन्दर आदी देवता मिल सारे करे पुकार तुम्हारे द्वारे दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आये तुम ही खंडा हाथ उठाये दासो को सदा बचाने आई 'चमन' की आस पुजाने आई

Chandraghanta mata ji ki aarti (hindi)

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जय माँ चन्द्रघंटा जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम पूर्ण कीजो मेरे काम चन्द्र समान तू शीतल दाती चन्द्र तेज किरणों में समाती क्रोध को शांत बनाने वाली मीठे बोल सिखाने वाली मन की मालक मन भाती हो चन्द्र घंटा तुम वरदाती हो सुंदर भाव को लाने वाली हर संकट मे बचाने वाली हर बुधवार जो तुझे ध्याये श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय मूर्ति चंदर आकार बनाये सन्मुख घी की ज्योत जलाये शीश झुका कहे मन की बाता पूर्ण आस करो जगदाता कांची पुर स्थान तुम्हारा करनाटिका मे मान तुम्हारा नाम तेरा रटू महारानी 'चमन' की रक्षा करो भवानी

Aarti kushmanda mata ji ki (Hindi)

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Aarti kushmanda mata ji ki (Hindi) कुष्मांडा जय जग सुखदानी मुझ पर दया करो महारानी पिंगला ज्वालामुखी निराली शाकम्बरी माँ भोली भाली लाखो नाम निराले तेरे भगत कई मतवाले तेरे भीमा पर्वत पर है डेरा स्वीकारो प्रणाम ये मेरा संब की सुनती हो जगदम्बे सुख पौचाती हो माँ अम्बे तेरे दर्शन का मै प्यासा पूर्ण कर दो मेरी आशा माँ के मन मै ममता भारी क्यों ना सुनेगी अर्ज हमारी तेरे दर पर किया है डेरा दूर करो माँ संकट मेरा मेरे कारज पुरे कर दो मेरे तुम भंडारे भर दो तेरा दास तुझे ही ध्याये 'चमन' तेरे दर शीश झुकाए

Mata Brahmacharini ji ki Aarti

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द्वितीय शक्ति ब्रह्मचारिणी  नवदुर्गाओं में दूसरी दुर्गा का नाम ब्रह्माचारिणी है। इनकी पूजा-अर्चना नवरात्र की द्वितीया तिथि के दौरान की जाती है। ब्रह्माचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय और भव्य है। मां दुर्गा का स्वरूप भक्तों को अनंत फल देनेवाला है। इनकी उपासना से जीवन के कठिन संघर्षों में भी भक्त का मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता। मां ब्रह्माचारिणी की कृपा से भक्तों को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।  आरती देवी ब्रह्माचारिणी जी की  जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।  जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।  ब्रह्मा जी के मन भाती हो।  ज्ञान सभी को सिखलाती हो।  ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।  जिसको जपे सकल संसारा।  जय गायत्री वेद की माता।  जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।  कमी कोई रहने न पाए।  कोई भी दुख सहने न पाए।  उसकी विरति रहे ठिकाने।  जो ​तेरी महिमा को जाने।  रुद्राक्ष की माला ले कर।  जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।  आलस छोड़ करे गुणगाना।  मां तुम उसको सुख पहुंचाना।  ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। ...

Maa Shailputri ji ki Aarti

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प्रथम शक्ति मां शैलपुत्री  पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती के स्वरूप में साक्षात शैलपुत्री की पूजा नवरात्र के प्रथम दिन होती है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प है। ये नंदी नामक वृषभ पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं। शैलराज हिमालय की कन्या होने के कारण नवदुर्गा का सर्वप्रथम स्वरूप शैलपुत्री कहलाता है। घोर तपस्या करने वाली शैलपुत्री समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक भी हैं। वे सब लोग देवी शैलपुत्री की आराधना करते हैं, जो योग, साधना, तप और अनुष्ठान के लिए पर्वतराज हिमालय की शरण लेते हैं।  आरती देवी शैलपुत्री जी की  शैलपुत्री मां बैल असवार।  करें देवता जय जयकार।  शिव शंकर की प्रिय भवानी।  तेरी महिमा किसी ने ना जानी।  पार्वती तू उमा कहलावे।  जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।  ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।  दया करे धनवान करे तू।  सोमवार को शिव संग प्यारी।  आरती तेरी जिसने उतारी।  उसकी सगरी आस पुजा दो।  सगरे दुख तकलीफ मिला दो।  घी का सुंदर दीप जला के।  गोला गरी का भोग लगा के।  श्रद्धा भाव से ...