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कई सालों से ये मंदिर खड़ा है टेढ़ा, पांड़वों ने करवाया था निर्माण-This temple has been crooked for many years, Pandavas got it constructed

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आज आपको टेढ़ा मंदिर के बारे में जानकारी देते हैं। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ज्वालामुखी के पास स्थित है। ज्वालामुखी के ज्वाला देवी मंदिर की बगल से ही इसके लिए रास्ता जाता है। ज्वाला जी से इसकी दूरी करीब दो किलोमीटर है। पूरा रास्ता ऊबड़-खाबड़ पत्थरों से युक्त चढ़ाई भरा है। खतरनाक डरावने सुनसान जंगल से होकर यह रास्ता जाता है। यह मंदिर पिछले 104 सालों से टेढ़ा है। कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान पांडवों ने इसका निर्माण कराया था। 1905 में कांगड़ा में एक भयानक भूकंप आया। इससे कांगड़ा का किला तो बिलकुल खंडहरों में तब्दील हो गया। भूकंप के ही प्रभाव से यह मंदिर भी एक तरफ को झुककर टेढ़ा हो गया। तभी से इसका नाम टेढ़ा मंदिर है। इसके अन्दर जाने पर डर लगता है कि कहीं यह गिर ना जाए। ...

Brahma Temple, Pushkar, Rajasthan-ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर, राजस्थान

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  पुष्कर   राजस्थान  में विख्यात  तीर्थस्थान  है जहाँ प्रतिवर्ष प्रसिद्ध 'पुष्कर मेला' लगता है। यह राजस्थान के अजमेर जिले में है। यहाँ  ब्रह्मा  का एक मन्दिर है। पुष्कर  अजमेर शहर से १४ की.मी दूरी पर स्थित है। भारत  के  राजस्थान  राज्य में  अरावली श्रेणी  की घाटी में अजमेर नगर से पाँच मील पश्चिम अजमेर जिले का एक नगर तथा स्थानीय मंडी है। इसके निकटवर्ती क्षेत्र में ज्वार, बाजरा, मक्का, गेहूँ तथा गन्ने की उपज होती है। कलापूर्ण कुटीर-वस्त्र-उद्योग, काष्ठ चित्रकला, तथा पशुओं के व्यापार के लिए यह विख्यात है। यहाँ पवित्र  पुष्कर झील  है तथा समीप में ब्रह्मा जी का पवित्र मंदिर है, जिससे प्रति वर्ष अनेक तीर्थयात्री यहाँ आते हैं। अक्टूबर, नवंबर के महीनों में यहाँ एक विशेष धार्मिक एवं व्यापारिक महत्व का मेला लगता है। इसका धार्मिक महत्व अधिक है। यह सागरतल से २,३८९ फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो  औरंगजेब  द्वारा ध्वस्त करने के बाद पुन: निर्मित किए गए हैं। इतिहास पुष्कर के उद्भव का वर्णन...

भुरेश्वर महादेव मंदिर -BHURSHING MAHADEV TEMPLE

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 भूरसिंह महादेव (या भुरेश्वर महादेव) मंदिर एक शानदार मंदिर है जिसे स्थानीय देवता भूर सिंह और उनकी बहन दही देवी की याद में एक चट्टान पर बनाया गया है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में समुद्र तल से 1870 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इस जगह के बारे में कुछ आध्यात्मिक और दिव्य है, जिसे आप महसूस करते हैं कि जब आप वहाँ पहुँचते हैं। मेले को छोड़कर, पूरे वर्ष में जगह बहुत कम है। इस करामाती जगह की शांति और शांति आत्मा सुखदायक है। यह भूर सिंह और उसकी बहन देही देवी की कहानी है, जो पनवा गांव में एक ब्राह्मण परिवार से थीं। उन्हें भाटों के रूप में भी जाना जाता था जो विभिन्न अनुष्ठानों जैसे भगवान (देवता लगन) का आह्वान करते थे। बीमार भाग्य के लिए, भूर सिंह की माँ की मृत्यु हो गई और उनके पिता ने फिर से शादी की। सौतेली माँ घर से अपने पिता की अनुपस्थिति में भूर सिंह और उसकी बहन पर कठोर थी। एक बार उसने भूर सिंह को जंगल में झोपड़ी काटने के लिए भेजा और जब वह लौटा तो एक बछड़ा गायब था। इसलिए उसने उसे सज़ा दी और कहा कि वह घर में तभी प्रवेश कर सकती है जब वह लापता बछड़े को वापस लाएगी। बाद में रात में जब...

Katasraj temple, Pakistan (कटासराज मन्दिर पाकिस्तान)

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कटास राज पाकिस्तान के पाकिस्तानी पंजाब।पंजाब प्रान्त के उत्तरी भाग में नमक कोह पर्वत शृंखला में स्थित हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है । यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है । इसके अतिरिक्त और भी मंदिरों की श्रृंखला है जो दसवीं शताब्दी के बताये जाते हैं । ये इतिहास को दर्शाते हैं। इतिहासकारों एवं पुरात्तव विभाग के अनुसार, इस स्थान को शिव नेत्र माना जाता है । जब माँ पार्वती सती हुई तो भगवान शिव की आँखों से दो आंसू टपके । एक आंसू कटास पर टपका जहाँ अमृत बन गया यह आज भी महान सरोवर अमृत कुण्ड तीर्थ स्थान कटास राज के रूप में है दूसरा आंसू अजमेर राजस्थान में टपका और यहाँ पर पुष्करराज तीर्थ स्थान है । इसके अतिरिक्त महाभारत काल में पांडव बनवास के दिनों में इन्ही पहाड़ियों में अज्ञातवास में रहे।यहीं वह कुण्ड है जहाँ पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे । इस कुण्ड पर यक्ष का अधिकार था सर्वप्रथम नकुल पानी लेने गया जब पानी पीने लगा तो यक्ष ने आवाज़ दी की इस पानी पर उसका अधिकार है पीने की चेष्टा मत करो अगर पानी लेना है तो पहले मेरे प्रश्नों का उत्तर दो लेकिन वह उसके ...

Kameshwar Dham (कामेश्वर धाम )

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  भगवान शिव द्वारा कामदेव को भस्म  करने कि कथा (कहानी) शिव पुराण मे इस प्रकार है। भगवान शिव कि पत्नी सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ मे अपने पति भोलेनाथ का अपमान सहन नही कर पाती है और यज्ञ वेदी मे कूदकर आत्मदाह कर लेती है। जब यह बात शिवजी को पता चलती है तो वो अपने तांडव से पूरी सृष्टि मे हाहाकार मचा देते है। इससे व्याकुल सारे देवता भगवान शंकर को समझाने पहुंचते है। महादेव उनके समझाने से शान्त होकर, परम शान्ति के लिए, गंगा तमसा के इस पवित्र संगम पर आकर समाधि मे लिन हो जाते है। इसी बीच महाबली राक्षस तारकासुर अपने तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है जिससे की उसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र द्वारा ही हो सकती थी।  यह एक तरह से अमरता का वरदान था क्योकि सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव समाधि मे लीन हो चुके थे। इसी कारण तारकासुर का उत्पात दिनो दिन बढ़ता जाता है और वो स्वर्ग पर अधिकार करने कि चेष्टा करने लगता है। यह बात जब देवताओं को पता चलती है तो वो सब चिंतित हो जाते है और भगवान शिव को समाधि से जगाने का निश्चय करते है। इसके लिए वो कामदेव को सेनापति बनाकर...

Danteshwari Temple (दंतेश्‍वरी मंदिर - दन्तेवाड़ा)

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  छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की हसीन वादियों में स्तिथ है, दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्‍वरी मंदिर।  देवी पुराण में शक्ति पीठों की संख्या 51 बताई गई है जबकि तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ बताए गए हैं। जबकि कई अन्य ग्रंथों में यह संख्या 108 तक बताई गई है। दन्तेवाड़ा को हालांकि देवी पुराण के 51 शक्ति पीठों में शामिल नहीं किया गया है लेकिन इसे देवी का 52 वा शक्ति पीठ माना जाता है।  मान्यता है की यहाँ पर सती का दांत गिरा था इसलिए इस जगह का नाम दंतेवाड़ा और माता क़ा नाम दंतेश्वरी देवी पड़ा। 51 शक्ति पीठों की जानकारी और शक्ति पीठों के निर्माण कि कहानी आप हमारे पिछले लेख  51 शक्ति पीठ  में पढ़ सकते है। दंतेश्‍वरी मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदीयों के संगम पर स्तिथ हैं। दंतेश्‍वरी देवी  को बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी का दर्ज़ा प्राप्त है। इस मंदिर की एक खासियत यह है की माता के दर्शन करने के लिए आपको लुंगी या धोति पहनकर ही मंदीर में जाना होगा।  मंदिर में सिले हुए वस्त्र पहन कर जानें की मनाही है। मंदिर के निर्माण क...

भस्मासुर से बचने के लिए यहां छिपे थे भगवान शिव

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श्रीखंड महादेव, भगवान शिव का ये सबसे पूजनीय स्‍थल माना जाता है। इसकी कहानी भी बड़ी ही रोचक है। भगवान शिव को कई महीनों तक मजबूरी में यहां की गुफा में छिपना पड़ा था। हिमाचल के जिला कुल्‍लू में करीब 18500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह श्रीखंड महादेव सदियों से भगवान शिव के विशाल शिवलिंग रूप का गवाह बनता रहा है। भगवान शिव को यहां अपने एक भक्त की वजह से छिपना पड़ा था। कहा जाता है कि भस्मासुर नामक राक्षस ने कई वर्षों तक भगवान शिव की कड़ी तपस्या की थी। उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान भोलेनाथ ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। भस्मासुर ने कहा कि उसे ऐसा वरदान चाहिए कि जिस जीव के सिर पर भी वह हाथ रखेगा वह उसी समय भस्म हो जाएगा। भोलेनाथ भगवान ने भी उसे यह वरदान दे दिया। वरदान पाने के बाद भस्मासुर घमंड से भर गया। उसने भगवान शिव को ही जलाने की तैयारी कर ली। इससे बचने के लिए भगवान शिव को निरंमंड के देओढांक में स्थित एक गुफा में छिपना पड़ा। कई महीनों तक भगवान शिव को यहां रहना पड़ा। उधर, भगवान विष्‍णु ने भगवान शिव को बचाने और भस्मासुर का खात्मा करने के लिए मोहिनी नाम की एक सुंदर महिला का रूप धारण कर लि...

काठगढ़ महादेव, दुनिया का एकमात्र अर्धनारीश्वर मंदिर-Kathgarh Mahadev, world's only Ardhanarishwar temple

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मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू  है। इस शिव मंदिर में विशाल शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है, जिसे मां पार्वती और भगवान शिव के रूपों में माना जाता है। खास बात यह है कि ग्रहों और नक्षत्रों के अनुसार इनके दोनों भागों के बीच का अंतर घटता-बढ़ता रहता है। माता पार्वती और  सांप भी स्वयंभू प्रकट हुए हैं… देवभूमि  हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इंदौरा उपमंडल में स्थित काठगढ़ महादेव मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर के साथ कई पौराणिक किवदंतियां जुड़ी हुई है। लोगों के कथनानुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू प्रकट है। इस शिव मंदिर में विशाल शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है, जिसे मां पार्वती और भगवान शिव के रूपों में माना जाता है। खास बात यह है कि ग्रहों और नक्षत्रों के अनुसार इनके दोनों भागों के बीच का अंतर घटता-बढ़ता रहता है। माता पार्वती और उनका प्रिय सांप भी स्वयं-भू प्रकट है। गर्मी के मौसम में यह अलग हो जाते हैं और सर्दियों में आपस में जुड़ जाते हैं। इसी रहस्य के कारण यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। काठगढ़ मंदिर के महत्व के बारे में कई कथाएं प्रचलि...

सिमसा माता मंदिर, हिमाचल प्रदेश-Simsa Mata Temple, Himachal Pradesh

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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के लड़-भड़ोल तहसील के सिमस नामक खूबसूरत स्थान पर स्थित माता सिमसा मंदिर दूर दूर तक प्रसिद्ध है। माता सिमसा या देवी सिमसा को संतान-दात्री के नाम से भी जाना जाता है। हर वर्ष यहां निसंतान दंपति संतान पाने की इच्छा ले कर माता के दरबार में आते हैं। नवरात्रों में होने वाले इस विशेष उत्सव को स्थानीय भाषा में सलिन्दरा कहा जाता है। सलिन्दरा का अर्थ है स्वप्न आना होता है। नवरात्रों में निसंतान महिलायें मंदिर परिसर में डेरा डालती हैं और दिन रात मंदिर के फर्श पर सोती हैं ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं माता सिमसा के प्रति मन में श्रद्धा लेकर से मंदिर में आती हैं माता सिमसा उन्हें स्वप्न में मानव रूप में या प्रतीक रूप में दर्शन देकर संतान का आशीर्वाद प्रदान करती है। स्वप्न में लकड़ी या पत्थर दिखने पर नहीं होती है संतान मान्यता के अनुसार, यदि कोई महिला स्वप्न में कोई कंद-मूल या फल प्राप्त करती है तो उस महिला को संतान का आशीर्वाद मिल जाता है। देवी सिमसा आने वाली संतान के लिंग-निर्धारण का भी संकेत देती है। जैसे कि, यदि किसी महिला को अमरुद का फल मिलता है तो समझ लें कि लड़का हो...

सुध महादेव मंदिर, जम्मू - यहाँ भगवान शिव का खंडित त्रिशूल है।-Sudh Mahadev Temple, Jammu - Here is the fragmented trident of Lord Shiva.

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पुराणों के अनुसार, माता पार्वती नियमित रूप से इस मंदिर में पूजा करने के लिए इस मंदिर में आती थीं। एक दिन जब पार्वती वहाँ पूजा कर रही थीं, तब सुधन्ता दानव, जो स्वयं भगवान शिव के भक्त थे, पूजा करने के लिए वहाँ आए। जब सुधन्ता ने माँ पार्वती को वहाँ पूजा करते देखा, तो वह पार्वती से बात करने के लिए उनके पास गई। जैसे ही माता पार्वती ने पूजा के बाद अपनी आँखें खोलीं, वह एक दानव को अपने सामने खड़ा देखकर घबरा गईं। वह घबराहट में जोर से चिल्लाया। उसके चिल्लाने की आवाज़ भगवान शिव तक पहुँची और कैलाश में समा गई। महादेव ने पार्वती के खतरे को जानकर राधार को मारने के लिए अपना त्रिशूल फेंक दिया। त्रिशूल आकर सुधांत के सीने में लगा। दूसरी ओर, त्रिशूल फेंकने के बाद, शिवाजी को पता चला कि उन्होंने अनजाने में एक बड़ी गलती की थी। इसलिए उन्होंने वहाँ आकर सुधन्ता को फिर से जीवन देने की पेशकश की, लेकिन राक्षस सुधन्ता ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह उन लोगों के हाथों से मर कर मोक्ष प्राप्त करना चाहती है। प्रभु ने उनकी बात मानी और कहा कि यह स्थान आज से तुम्हारे नाम पर सुधा महादेव के नाम पर होना चाहिए। उसी समय, उसने...

आज भी भगवान गणेश का अलग सिर इस गुफा में रखा हुआ है-Even today a separate head of Lord Ganesha is kept in this cave

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सनातन धर्म में कोई भी शुभ कार्य भगवान गणेश की पूजा से शुरू होता है। पूरे भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो भगवान गणेश के बारे में नहीं जानता हो, चाहे वह उनका आकर्षक बाल रूप हो या माता-पिता के प्रति समर्पित युवा रूप हो या ज्ञान से भरा उनका अनूठा रूप हो। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गणेश यानी गण + ईश = गणेश भगवान को भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र की सुगंधित श्राप  से बनाया गया था। हम सभी जानते हैं कि गणेश का माथा उनके पिता शिव ने कैसे काटा था और फिर इसे हाथी के माथे के स्थान पर स्थापित किया गया था। वास्तव में, गणेश के जन्म और प्रकृति को मानव जाति को प्रतीकात्मक रूप से ज्ञान देने के लिए डिजाइन किया गया है, जैसे कि अहंकार और अहंकार का प्रतीक है और सहिष्णुता और सहिष्णुता की भावना में हाथी के माथे को लगाते हैं।  यदि आपको गणेश का कोई चित्र या मूर्त रूप दिखाई देता है, तो वह उसमें हाथी का सिर लगाते हुए दिखाई देते हैं। क्या आप जानते हैं कि गणेश का असली सिर कहां है? गणेश का असली सिर हिमालय भुवनेश्वर गुफा में है। हिंदू धर्म शास्त्रों में वर्णित सिर का प्रकार बिल्कुल एक जैसा है...

रेणुका तीर्थ - यह माना जाता है कि माँ रेणुका आज भी भगवान परशुराम से मिलने के लिए आती हैं-Renuka Shrine - It is believed that Maa Renuka still comes to meet Lord Parashurama.

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रेणुका तीर्थ - यह माना जाता है कि माँ रेणुका आज भी  भगवान परशुराम से मिलने के लिए आती हैं माँ और बेटे के पवित्र मिलन का श्री रेणुका जी मेला हिमाचल प्रदेश के प्राचीन मेलों में से एक है। जिसे हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन से उत्तर भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री रेणुका में मनाया जाता है। जनश्रुति के अनुसार, इस दिन भगवान परशुराम अपनी माता रेणुका से मिलने के लिए साल में एक बार जमुकोटी जाते हैं। यह मेला वात्सल्य और श्री रेणुका माँ के पुत्र की श्रद्धा का अनूठा संगम है। यह स्थान नाहन से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है। रेणुका झील के किनारे, माँ श्री रेणुका और भगवान परशुराम का भव्य मंदिर स्थित है। पौराणिक संदर्भ कहानी के अनुसार, हयवंशी प्राचीन काल में आर्यावर्त में क्षत्रिय शासन करते थे। भृगुवंशी ब्राह्मण उनके पुरोहित थे। महर्षि जमदग्नि का जन्म इसी भृगु वंश के महर्षि ह्रीलिक से हुआ था। उनका विवाह रेणु की पुत्री रेणुका से हुआ, जो इक्ष्वाकु वंश की ऋषि थीं। महर्षि जमदग्नि का परिवार इस क्षेत्र में तपस्या करने लगा। जिस स्थान पर उन्होंने तपस्या की, उसे ऊष्मा का टीला कहा जाता है। म...

विदेशों में प्रसिद्ध और भव्य शिव मंदिर-famous and grand Shiva temples abroad

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1. शिव हिंदू मंदिर - ज़ुइदोस्त, एम्स्टर्डम  यह मंदिर लगभग 4,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के दरवाजे जून 2011 को भक्तों के लिए खोले गए थे। भगवान शिव के साथ-साथ भगवान गणेश, देवी दुर्गा, भगवान हनुमान की भी इस मंदिर में पूजा की जाती है। यहां भगवान शिव पंचमुखी शिवलिंग के रूप में हैं। 1. Shiva Hindu Temple - Zuidost, Amsterdam  This temple is spread over an area of ​​about 4,000 square meters. The doors of this temple were opened to devotees on June 2011. Lord Shiva as well as Lord Ganesha, Goddess Durga, Lord Hanuman are also worshiped in this temple. Here Lord Shiva is in the form of Panchmukhi Shivling. 2. अरुलमिगु श्रीराजा कालिमान मंदिर - जोहोर बारू, मलेशिया  कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1922 के आसपास हुआ था। यह मंदिर जोहोर बारू के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। जिस भूमि पर यह मंदिर बना है वह भारतीयों को जोहर बारू के सुल्तान द्वारा प्रस्तुत की गई थी। कुछ समय पहले तक यह मंदिर बहुत छोटा था, लेकिन आज यह एक भव्य मंदिर बन गया है। मंदिर के गर्भग...