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दुर्गा माँ मन्त्र Durga Maa Mantra

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  दुर्गा माँ मन्त्र -  || ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ || ॐ दुं दुर्गायै नमः  Om Dum Durgayei Namaha  सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।।  “SARVA MANGALA MAANGALYE SHIVEYSARVAARTH SAADHIKEY, SHARNAYE TRAYAMBAKEY GAURI NAARAAYANI NAMOSTUTEY.”  *  शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायण नमोस्तुते।।  “SHARNAAGAT DEENAART PARITRAAN PARAAYANEY, SERVASYARTI HAREY DEVI NAARAAYANI NAMOSTUTEY.”  *  सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वेशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ।।  “SARVASVAROOPEY SARVESHEY SARVSHAKTI SAMANVIETEY, BHAYEBHYAH TRAAHI NO DEVI DURGE DEVI NAMOSTUTEY.”  *  रोगनशेषानपहंसि तुष्टा। रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।।  त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां। त्वमाश्रिता हृयश्रयतां प्रयान्ति।।  “ROGAAN SHOSHAAN PAHANSITUSHTARUSHTATU KAAMAAN SAKLAAN BHISHTAAN, TVAAM AASHRITAANAAM NA VIPANNARAANAM. TVAAMAASHRITAAHYA SHRAYTAAM PRAYAA...

विष्णु जी के मंत्र -Lord Vishnu Mantra

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भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए । ॐ नमोः नारायणाय. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय || Namoh narayanayaya. Namoh bhagavate vasudevaya. *********************************************************************** दरिद्रता से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।। Bhurida bhuri dehino, ma dabhram bhurya bhar. Bhuri ghedindra ditsasi. Bhurida tyasi shruta: Purutra sura vrtrahan. Aa no bhajasva radhasi. ********************************************************************************** घर में सुख-संपत्ति लाने के लिए विष्णु जी के इस मंत्र का जाप करना चाहिए। शांता कारम भुजङ्ग शयनम पद्म नाभं सुरेशम। विश्वधारंगनसदृशम्मेघवर्णं शुभांगम। लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्याननगमयम। वन्दे विष्णुम्भवभयहरं सर्व्वलोकैकनाथम।। Santa karama bhujanga Sayanama padma nabham suresama. Visvadharanganasadrsam'meghavarnam Subhangama Laksmi k...

चौंसठ योगिनी मंत्र-Sixty four yogini mantra

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चौंसठ योगिनी मंत्र 64 योगिनियों के भारत में चार प्रमुख मंदिर है। दो ओडिशा में तथा दो मध्यप्रदेश में। मध्यप्रदेश में एक मुरैना जिले के थाना थाना रिठौराकलां में ग्राम पंचायत मितावली में है।  इसे 'इकंतेश्वर महादेव मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलवा एक दूसरा मंदिर खजूराहो में स्थित है।  875-900 ई. के आसपास बना यह मंदिर खजुराहो के मंदिरों के पश्चिमी समूह में आता है। आपने अष्ट या चौंसठ योगिनियों के बारे में सुना होगा। कुछ लोग तो इनके बारे में जानते भी होंगे।  दरअसल ये सभी आदिशक्ति मां काली का अवतार है। घोर नामक दैत्य के साथ युद्ध करते हुए माता ने ये अवतार लिए थे। यह भी माना जाता है कि ये सभी माता पर्वती की सखियां हैं। इन चौंसठ देवियों में से दस महाविद्याएं और सिद्ध विद्याओं की भी गणना की जाती है। ये सभी आद्या शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। कुछ लोग कहते हैं कि समस्त योगिनियों का संबंध मुख्यतः काली कुल से हैं और ये  सभी तंत्र तथा योग विद्या से घनिष्ठ सम्बन्ध रखती हैं। समस्त योगिनियां अलौकिक शक्तिओं से सम्पन्न हैं तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभ...

महामृत्युंरजय मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं।

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*ॐ त्र्यंबकम् मंत्र* के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं। इन तैंतीस देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ महामृत्युंजय मंत्र से निहीत होती है जिससे महा महामृत्युंजय का पाठ करने वाला प्राणी दीर्घायु तो प्राप्त करता ही हैं । साथ ही वह नीरोग, ऐश्व‍र्य युक्ता धनवान भी होता है महामृत्युंरजय का पाठ करने वाला प्राणी हर दृष्टि से सुखी एवम समृध्दिशाली होता है । भगवान शिव की अमृतमययी कृपा उस निरन्तंर बरसती रहती है। • *त्रि* - ध्रववसु प्राण का घोतक है जो सिर में स्थित है। • *यम* - अध्ववरसु प्राण का घोतक है, जो मुख में स्थित है। • *ब* - सोम वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण कर्ण में स्थित है। • *कम* - जल वसु देवता का घोतक है, जो वाम कर्ण में स्थित है। • *य* - वायु वसु का घोतक है, जो दक्षिण बाहु में स्थित है। • *जा*- अग्नि वसु का घोतक है, जो बाम बाहु में स्थित है। • *म* - प्रत्युवष वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण बाहु के मध्य में स्थित है। • *हे* - प्रयास वसु मणिबन्धत में स्थित है। • *सु* -वीरभद्र रुद्...

जानिए आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।

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किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अनिवार्य रूप से किया जाता है, सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है l *कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।* *ये है इस मंत्र का अर्थ :* *इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है :* *कर्पूरगौरं-* कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले। *करुणावतारं-* करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं। *संसारसारं-* समस्त सृष्टि के जो सार हैं। *भुजगेंद्रहारम्-* इस शब्द का अर्थ है जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं। *सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि-* इसका अर्थ है कि जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है। *मंत्र का पूरा अर्थ :-* जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है। *यही मंत्र क्यों….* किसी भ...

जानिए, गायत्री मंत्र के हर शब्द का क्या अर्थ है?-Know, what is the meaning of every word of Gayatri Mantra?

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ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो  देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्। मंत्र का संपूर्ण भावार्थ ऊँ गायत्री का क्रम ऊँ से आरम्भ होता है, ऊँके ऋषि ब्रह्मा हैं। ऊँ का अकार, उकार, मकारात्मक स्वरूप है। उसके अनुसार ऊँ को सारी सृष्टि का मूल माना जाता है। ऊँ से ही सारी सृष्टि का विकास होता है। यह एक स्वतन्त्र विषय है। यहां केवल गायत्री पर ही कुछ कहते हैं। भूः सबसे पहले भूः शब्द आ रहा है, क्योंकि सामने वाली वस्तु को लांघ कर कोई नई बात नहीं कही जा सकती, सामने वाली चीज भूः से आरम्भ की जा रही है। वास्तविक आरम्भ भूः भुवः स्वः महः जनः तपः सत्यम् से है।  सत्यम् से भूः तक की स्थिति एक सूत्र से बंधी है किन्तु हमारी दृष्टि सत्यम् पर नहीं जा सकती। सामने की भूः को हम समझ सकते हैं इसलिए भूः से ही इसका आरम्भ करते हैं। दूसरी वैदिक रहस्य की बात है कि देवताओं की गणना में अग्निर्वै देवानां अवमः विष्णुः परमः यह कहा जाता है।  सबसे पहले अग्नि है, सबके अन्त में तैतीसवें विष्णु हैं। अग्नि शब्द परोक्ष भाषा का है। यह अग्रि (अर्थात् सबसे पहला) था जिसे बाद में अग्नि कहने लग गए। अग्नि का सम्बंध भूः से...

दुर्गा सप्तशती के सिद्ध चमत्कारी मंत्र

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मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्माजी ने मनुष्यों के रक्षार्थ परमगोपनीय साधन, कल्याणकारी देवी कवच एवं परम पवित्र उपाय संपूर्ण प्राणियों को बताया, जो देवी की नौ मूर्तियां-स्वरूप हैं, जिन्हें 'नवदुर्गा' कहा जाता है, उनकी आराधना आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी तक की जाती है।  श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है, क्योंकि श्री दुर्गा सप्तशती दैत्यों के संहार की शौर्य गाथा से अधिक कर्म, भक्ति एवं ज्ञान की त्रिवेणी हैं। यह श्री मार्कण्डेय पुराण का अंश है। यह देवी महात्म्य धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्रोत एवं मंत्र हैं, जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है। दुर्गा सप्तशती के सिद्ध चमत्कारी मंत्र * सर्वकल्याण हेतु -  सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके ।  शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥  * बाधा मुक्ति एवं धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए इस मंत्र का जाप फलदायी है- सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः। मनुष्यों मत्प्रसादेन भव‍िष्यंति न संशय॥ * आ...

Bagalamukhi Mantra and Aarti-बगलामुखी मंत्र और आरती,

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बगलामुखी मंत्र और आरती, इनके प्रभाव से मिलती है दुश्मनों पर जीत और कोर्ट केस में सफलता बगलामुखी देवी ब्रहमांड की दस सर्वश्रेष्ठ शक्तियों में से एक है। ये दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। ये कलयुग की अधिष्ठात्री देवी हैं। कलयुग में इनकी पूजा करने से तुरंत फल मिलता है। बगलामुखी देवी इस ब्रहमांड की स्तम्भन शक्ति हैं। इनकी पूजा दुश्मनों पर जीत हासिल करने के लिए की जाती है। खासतौर से कोर्ट-कचहरी और पुलिस के मामलों में उलझे निर्दोष लोग बगलामुखी देवी के मंत्र जपकर परेशानियाें से मुक्त हो सकते हैं। ये है बगलामुखी मंत्र - “ ऊं ह्ललीं बगलामुखीं सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिह्वां कीलय कीलय बुद्धिं विनाशय ह्ललीं ऊं स्वाहा ” इस मंत्र का जप करने से अचानक परेशानियां नहीं आती है और हार का सामना भी नहीं करना पड़ता। इस मंत्र का जप करने वाले लोगों की कोशिश बेकार नहीं जाती। जल्दी ही सफलता मिलती है। वहीं झूठे इस मंत्र के प्रभाव से झूठे आरोप में कोर्ट केस में फंसे लोगों को दुश्मनों पर जीत मिलती है। ऐसे लोगों को दुश्मन भी परेशान नहीं करते। बगलामुख...

शांति मंत्र (Shanti Mantra)

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शांति मंत्र शांति के लिए की जाने वाली हिंदू प्रार्थना है, आमतौर पर धार्मिक पूजाओं, अनुष्ठानों और प्रवचनों के अंत में यजुर्वेद के इस मंत्र का प्रयोग किया जाता है। शांति मंत्र (Shanti Mantra) ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति:। वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥ हिन्दी रूपांतरण: शान्ति: कीजिये, प्रभु त्रिभुवन में, जल में, थल में और गगन में, अन्तरिक्ष में, अग्नि पवन में, औषधि, वनस्पति, वन, उपवन में, सकल विश्व में अवचेतन में! शान्ति राष्ट्र-निर्माण सृजन, नगर, ग्राम और भवन में जीवमात्र के तन, मन और जगत के हो कण कण में, ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

Mata Shailputri's temple Kashi Varanasi-माता शैलपुत्री जी का मंदिर काशी वाराणसी

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नवरात्री में देवी दुर्गा के नौ रूपो की पूजा होती हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री माँ नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। नवरात्रि में दुर्गा पूजा के अवसर पर बहुत ही विधि-विधान से माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है। आइए जानते हैं प्रथम देवी शैलपुत्री का मंदिर देश के किस भाग में है और वहा कैसे की जाती है माँ कि पूजा।  मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप का मंदिर है मरहिअ घाट में जो की वाराणसी में है। यहाँ आज के दिन लोगो की भरी भीड़ रहती हैं। वही लोग लाखो का चढ़ावा भी चढ़ाते है। यहाँ आने वालो में ज्यादा तर महिलाएं रहती हैं, जो अपने सुहाग की लम्बी उम्र की मनोकामना करने माता के चरणो में आती हैं। लोग माता को लाल फूल, लाल चुनरी और मिस्ठान चढ़ाते हैं। लोग बड़े चाव से माता की कहानी सुनते है और उसके बाद मंदिर में महाआरती होती है। माता के इस भव्य रूप के दर्शन के लिए लोग दूर दूर से आते है और ...

Maa Brahmacharini's temple is in Kashi, she fulfills every wish-काशी में है मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर, करती हैं हर मनोकामना पूर

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मां ब्रह्मचारिणी का मंदिर काशी के सप्तसागर (कर्णघंटा) क्षेत्र में स्थित है. दुर्गा की पूजा के क्रम में ब्रह्मचारिणी देवी का दर्शन-पूजन बहुत महत्‍वपूर्ण माना गया है. सुबह से ही लग जाती है भीड़ काशी के गंगा किनारे बालाजी घाट पर स्थित मां ब्रह्मचारिणी के मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है. श्रद्धालु लाइन में लगकर मां का दर्शन प्राप्त करते हैं. श्रद्धालु मां के इस रूप का दर्शन करने के लिए नारियल, चुनरी, माला-फूल आदि लेकर श्रद्धा-भक्ति के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं. मां के दर्शन करने से मिलती है परब्रह्म की प्राप्ति ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यन्त भव्य है. इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बायें हाथ में कमंडल रहता है. जो देवी के इस रूप की आराधना करता है उसे साक्षात परब्रह्म की प्राप्ति होती है. मां के दर्शन मात्र से श्रद्धालु को यश और कीर्ति प्राप्त होती है. हर मनोकामना होती है पूरी यहां ना सिर्फ काशी बल्कि अन्य जिलों से भी लोग दर्शन एवं पूजन के लिए आते हैं. नवरात्रि पर तो इस मंदिर में लाखों भक्त मां के दर्शन करने के लिए आते ...