संत झूलेलाल जी : हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के भगवान-संत झूलेलाल जी: हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के भगवान
समूचे विश्व में फैले सिंधी समुदाय के लोग प्रतिवर्ष चैत्रमास की चन्द्रतिथि को अपने आराध्य देव संत झूलेलाल का जन्मोत्सव प्रेम-भाईचारे एवं राष्ट्रीय एकता के रूप में मनाते हैं। इस दिन को ‘सिंधी दिवस’ या ‘सिंधियत’ भी कहा जाता है। जलपति वरुणावतार भगवान झूलेलाल भगवान श्री कृष्ण के ही अवतार माने जाते हैं। संत झूलेलाल के संबंध में यह कहा जाता है कि लगभग 1040 वर्ष पूर्व सिंध (पाकिस्तान) में मुगल बादशाह मिरखशाह के अत्याचारों से जनता बेहद त्रस्त थी। बादशाह मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए जनता पर जुल्म ढाने लगा तो चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई और इस संकट की घड़ी में त्रस्त लोगों ने सिंधु नदी के तट पर वरुण देव की पूजा-अर्चना कर बादशाह के अत्याचारों से छुटकारा पाने की प्रार्थना की। लगभग सात दिन तक लोगों ने ‘वरुण देव’ की पूजा की। तब अपने भक्तों की पुकार सुन वरुण देवता मछली पर सवार होकर संत ‘झूलेलाल’ के रूप में प्रकट हुए और कहा कि वह शीघ्र ही अत्याचारियों का नाश करने के लिए नसीरपुर शहर में रतन राय के घर जन्म लेंगे। कुछ समय बाद संत झूलेलाल ने माता देवकी की कोख से जन्म लिया और बालक का नाम घर वालों...