There are nine temples of nine goddesses in Kashi, know their characteristics-काशी में है नौ देवियों के नौ मंदिर, जानिये इनकी विशेषताएं




हिन्दू धर्म में शिव और शक्ति की मान्यता है।
कहा जाता है कि शक्ति निराकार है, मगर सजीव है।
शिव स्थूल है, मगर निर्जीव है।
जब शिव में शक्ति का का वास होता है, तो स्थूल शरीर में जान आती है।
शिव के बिना शक्ति कहाँ बसे और शक्ति के बिना शिव कैसे हिले।
इस शिव और शक्ति को आसानी से समझने के लिए पुरुष और स्त्री का उदाहरण सही रहेगा।
हिन्दू धर्म में शक्ति यानी स्त्री का कितना सम्मान करते है, वो ९ दिन चलने वाले नवरात्री के त्यौहार से जगजाहिर है।
नवरात्रि के दौरान शक्ति के ९ रूपों की पूजा होती है। इन नौ रूपों को क्या नाम हैं, और इनका हमारी ज़िन्दगी से क्या जुड़ाव है, ये समझने के लिए हर रूप के बारे में जानना ज़रूरी है।
शक्ति के रूप जानने के साथ ही आपको ये भी पता लगेगा कि भारत में इनके मंदिर कहाँ-कहाँ हैं। पूरे परिवार के साथ इन मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं तो भारत की संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलता है, परिवार के छोटे बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते हैं, सब एक दूसरे के करीब आते हैं।
शक्ति का संचार होने से आपके पूरे परिवार में सुख, समृद्धि, शांति और उन्नति का संचार होता है और ज्ञान का उजाला फैलता है।
आइये आपका शक्ति के नौ मुख्य रूपों से परिचय करवाएं :
शैलपुत्री
देवी शैलपुत्री की कहानी शिव की पत्नी सती से शुरू होती है। राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने अपने शरीर को योगाग्नि से भस्म कर लिया और शिव ने अपनी पत्नि को खोने के दुःख में दक्ष के यज्ञ को तहस-नहस कर दिया।
सती रूप त्यागने के बाद शक्ति ने फिर से पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लिया । पर्वत को शैल भी कहते हैं । इसीलिए पर्वतराज हिमालय के यहाँ कन्या के रूप में जन्मी शक्ति को शैलपुत्री कहा गया।
शक्ति का ये रूप एक तरह से कन्या के जन्म होने का प्रतीक है। जब किसी के घर में कन्या होती है, तो साक्षात् शक्ति ने देवी शैलपुत्री के रूप में उनके यहाँ जन्म लिया है।
देवी शैलपुत्री के मंदिर
शैलपुत्री मंदिर, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
हेदावड़े महालक्ष्मी, हेडावड़े गाँव, मुंबई-अहमदाबाद हाईवे, वसई विरार क्षेत्र, महाराष्ट्र
ब्रह्मचारिणी
शैलपुत्री जब कुछ बड़ी हो गयी तो शिव को पतिरूप में पाने के लिए तप करने लग गयी। घर की सारी सुख-सुविधाएँ छोड़ कर जंगल में रहने वाली बालिका ब्रह्मचारिणी कहलायी। खाना-पीना तो देवी ने काफी समय पहले ही छोड़ दिया था, फिर एक समय आने पर पेड़ से गिरे हुए पत्ते खाना भी छोड़ दिया। गिरा हुआ पर्ण यानी पत्ता भी ना खाने से इनका नाम अपर्णा भी है। फिर इनके तप से खुश होकर शिव ने इन्हें शादी का वचन दिया।
शक्ति का ये रूप इंसान को कठोर तप करके अपने लक्ष्य को पाने का सन्देश देती है। साथ ही अगर कन्या अच्छे संस्कारों के साथ बड़ी होती है तो सही समय आने पर उसके लिए काबिल लड़कों के रिश्ते भी अच्छे आने लगते हैं।
देवी ब्रह्मचारिणी के मंदिर
ब्रह्मचारिणी मंदिर, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
चंद्रघंटा


शक्ति का ये रूप काफी सुन्दर है। मुख पर चाँद सी आभा वाली, लाल जोड़ा पहने शक्ति के इस रूप को चंद्रघंटा कहा गया है।
जब सही उम्र होने पर बालिका के विवाह का समय हो जाता है, तो शक्ति अपने चंद्रघंटा स्वरुप में आती हैं। शादी का लाल जोड़ा पहने और सिर पर चाँद का ताज पहने नवविवाहिता स्त्री को देवी चंद्रघंटा के रूप में पूजते हैं।
देवी चंद्रघंटा के मंदिर
चंद्रघंटा मंदिर, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
कुष्मांडा
'कु' का अर्थ है थोड़ा, 'ऊष्मा' का अर्थ है गर्मी, और ब्रह्माण्ड शब्द से '-आंड' शब्द लिया गया है। यानी जब नवविवाहित महिला अपने गर्भ की ऊष्मा में ब्रह्माण्ड का निर्माण कर रही होती हैं, तब शक्ति के इस रूप को देवी कुष्मांडा कहते हैं।
शब्द के अर्थ से ही पता चलता है कि गर्भावस्था के दौरान औरत में देवी कुष्मांडा की शक्ति बसती है।
मगर देवी का ये रूप सिर्फ औरत के रूप में नहीं है। जब इंसान अपने मन में कोई लक्ष्य पाने की ठान लेता है तो वो भी एक नए ब्रह्माण्ड की संरचना में लगा होता है। उस वक्त उसमें भी माँ कुष्मांडा की शक्ति बसती है।
देवी कुष्मांडा के मंदिर
कुष्मांडा मंदिर, कानपुर
स्कंदमाता
शिव-शक्ति के पुत्र कार्तिकेय का ही नाम स्कन्द भी है। जब शक्ति को पुत्र रूप में कार्तिकेय मिले, तो उन्हें स्कंदमाता कहा गया।
मतलब जब स्त्री माँ बनती है तो वो स्कंदमाता रूप में होती है।
स्कन्द यानी कार्तिकेय को युद्ध कला में निपुण सेनापतियों के सेनापति के रूप में माना जाता है। काबिल बेटा कौन नहीं चाहता। इसलिए बेटे की इच्छा रखने वाले जोड़े स्कंदमाता को पूजते हैं।
स्कंदमाता के मंदिर
स्कंदमाता वाराणसी, उत्तरप्रदेश
कात्यायनी
महर्षि कात्यायन ने जब कई साल शक्ति की पूजा की, तो उन्हें उनकी तपस्या का फल मिला। वे चाहते थे कि देवी उनके यहाँ पुत्री रूप में जन्म ले। फलस्वरूप जन्मी ऋषि कात्यायन की बेटी को कात्यायनी कहा गया।
जब घर में पुत्री का जन्म होता है, तो मानिये कि शक्ति स्वयं माँ कात्यायनी के रूप में आपके यहाँ जन्मी है।
माँ कात्यायनी के मंदिर
कात्यायनी मंदिर, अवेरसा, कर्नाटक
श्री कत्यायानी टेंपल, बकोर, जिला महिसागर, गुजरात
श्री कत्यायानी पीठ मंदिर, वृंदावन, (उ.प)
छत्तरपुर मंदिर, दिल्ली
श्री कत्यायानी मंदिर, चेरथला, अलप्पुझा, केरल
श्री कत्यायानी मंदिर, कोल्हापुर, महाराष्ट्र
श्री कात्यायिनी अम्मान मंदिर, मरथुराई, तँजाउर, जिला तँजोर, तमिल नाडु
श्री कत्यायानी शक्तिपीठ आधार देवी(अर्बुदा देवी) मंदिर, माउंट आबू, अरावली पर्वतमाला, राजस्थान
श्री कताई अम्मान मंदिर, नेल्ली तोप्पू, कोविलुर, तँजाउर, जिला तँजोर, तमिलनाडु
श्री कुमारनल्लूर करथयायानी मंदिर, कुमारनल्लूर, कोट्टायम, केरल
कालरात्रि
धरती से दुष्टता मिटाने के लिए शक्ति देवी कालरात्रि का रूप धरती है। गधे पर सवार, हाथ में हथियार लिए, जीभ निकाले, खुले बालों वाली कालरात्रि को मेरा प्रणाम।
मतलब ये है कि पति और बच्चों को सुधारने के लिए औरत को कई बार कालरात्रि रूप धरना पड़ता है। गधे की सवारी से अर्थ है कि सुधार के इस काम में किसी तरह की कोई शर्म नहीं रखी जाए। बाहर निकली जीभ का अर्थ है कि जरूरत पड़ने पर खूब डाँट-फटकार लगाई जाए। हाथ में हथियार का अर्थ है कि अगर सुधार कार्य में हाथापाई करनी पड़े तो भी ठीक है।
पति शराब पीकर घर आया है? लीजिये कालरात्रि रूप।
बेटे ने बहन पर हाथ उठाया ? लीजिये कालरात्रि रूप।
बेटी की संगत अच्छी नहीं है ? कालरात्रि रूप।
प्रणाम
देवी कालरात्रि के मंदिर
कालरात्रि मंदिर, वाराणसी, उत्तरप्रदेश
कालरात्रि मंदिर, डुमरी बुज़ुर्ग, नयागाँव, बिहार
कालरात्रि मंदिर , विंध्याचल, मिर्ज़ापुर
कालरात्रि मंदिर, इंदौर, मध्य प्रदेश
महागौरी
कालरात्रि के रूप में सुधार कार्य के बाद जब पति और बच्चों में ज्ञान का प्रकाश जागता है तो शक्ति भी खूब खुश होती है। इसी ख़ुशी की चमक देवी के मुख पर भी दिखती है
शक्ति के इस रूप को महागौरी कहा गया।
देवी के इस रूप का एक और अर्थ है। कात्यायनी रूप में जन्मी देवी जब सोलह साल की हुई तो उनकी सुंदरता ऐसी अद्भुत थी, रंग इतना साफ़ था, कि उन्हें महागौरी पुकारा गया।
सफ़ेद कपडे पहने माँ महागौरी को श्वेताम्बरधारी भी कहा गया।
माँ महागौरी के मंदिर
महागौरी मंदिर, लुधियाना, पंजाब
सिद्धिदात्री
देवीपुराण में लिखा गया है कि माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही शिव ने सिद्धियाँ पायी थी। मार्कण्डेय पुराण में आठ सिद्धियाँ बतायी गयी है : अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।
यानी अगर पुरुष अपनी शक्ति यानी स्त्री की इज़्ज़त करता है, उसकी सलाह लेता है, उससे तालमेल बनाकर चलता है तो वो दुनिया में सबकुछ पा लेता है।
माँ सिद्धिदात्री के मंदिर
सिद्धिदात्री, सागर मध्य प्रदेश
सतना मध्य प्रदेश
देवपहरी, छत्तीसगढ़

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