श्री गणेश संकट चौथ व्रत Shri Ganesh Sankat Chouth Vrat

Shri Ganesh Sankat Chouth Vrat


गणेश चतुर्थी का व्रत माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है| इस दिन विधा – बुद्धि – वारिधि के सवामी गणेश तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है |

माता पार्वती ने भी भगवान शंकर के कहने पर माघ कृष्ण चतुर्थी को संकष्ट हरण श्री गणेश जी का व्रत रखा था | फलस्वरूप उन्हें गणेश जी पुत्रस्वरूप में प्राप्त हुए| भगवान शंकर के मस्तक पर सुशोभित होने वाला चंद्रमा आज के दिन श्री गणेश भगवान के मस्तक पर विराजमान होता है| इसलिए आज चंद्रा दर्शन का अर्थ है श्री गणेश भगवान के दर्शन होना|

माघ मास में ‘भालचन्द्र’ नामक गणेश की पूजा करनी चाहिए | इनका पूजन षोडशोउपचार विधि से करना चाहिए | तिल के दस लड्डू बनाकर, पांच लड्डू देवता को चढ़ावे और शेष पांच ब्रह्मण को दान दे देवें | मोदक तथा गुड मे बने तिल (सफेद) के लड्डू और मगदल का नैवेद्या अर्पित करें- चावल के लड्डू भी चढ़ाएं | चंद्र दर्शनकरें और चंद्रमा को भी अर्घ्या प्रदान करें| क्योंकि इस दिन भगवान गणेश चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण करतें हैं| माघ कृष्ण – गणेश चतुर्थी व्रत कथा ( ऋषि शर्मा ब्राह्मण की कथा ) पढ़े या सुने |

Ganesh Sankashti Chaturthi Mantra Stuti

गणेशाय नमस्तुभ्यं सर्वसिद्दिप्रदायकम.
संकष्ठ हरणं मे देव गृहानार्घः नमोस्तुते -
कृष्ण पक्षे चतुर्थ याँ तू सम्पुजितिम विधुदये.
क्षिप्रं प्रसीद देवेश गृहानार्घः नमोस्तुते -


Chaturthi Tithi Mantra

तिथिनामुत्तमे देवी गणेश प्रियेवाल्लभे-
सर्वसंकट नाशाय गृहण अर्घ्य नमोस्तुते .
“चतुर्थ येई नमः ” इदम् अर्घ समर्पयामि

Comments

Popular posts from this blog

Kali Mata Temple of Kalka, Panchkula पंचकूला के कालका का काली माता मंदिर

History of Baglamukhi Temple of Kangra काँगड़ा के बगलामुखी मंदिर का इतिहास

Mata Bhimeshwari Devi Temple at Beri-बेरी में माता भीमेश्वरी देवी मंदिर