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Baglamukhi Temple- बगलामुखी मंदिर कांगड़ा

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  भारत में माँ बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है।  आज हम बात कर रहे है हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले के बगलामुखी मंदिर के बारे में । बगलमुखी मंदिर कांगड़ा: बगलमुखी मंदिर कांगड़ा जिले के एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। कई भक्त यहाँ हर रोज हिंदू देवी बगलमुखी  की पूजा करने आते हैं, जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं में दस बुद्धि की देवी में एक माना जाता है। बगलामुखी मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जनपद के बनखंडी क़स्बा में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह मंदिर हिन्दू धर्म के लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है। बगुलामुखी का यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। पांडुलिपियों में माँ के जिस स्वरूप का वर्णन है, माँ उसी स्वरूप में यहाँ विराजमान हैं। ये पीतवर्ण के वस्त्र, पीत आभूषण तथा पीले रंग के पुष्पों की ही माला धारण करती हैं। ‘बगलामुखी जयंती’ पर यहाँ मेले का आयोजन भी किया जाता है। ‘बगलामुखी जयंती’ पर हर वर्ष हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त देश के विभिन्न ...

गोकर्णनाथ मंदिर: जहां रावण द्वारा शिवलिंग रखा गया था- Gokarnanath Temple: where Shivalinga was kept by Ravana

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  उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में छोटी काशी के नाम से विख्यात गोला गोकर्णनाथ में लंकापति रावण द्वारा रखे शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। जिला मुयालय से 35 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में भक्तगण अपनी मुरादें लेकर आते हैं और भगवान आशुतोष के दरबार मे अपनी हाजिरी लगाकर पूजा अर्चना करते हैं।  बाबा की इस नगरी में वैसे तो साल भर मेले जैसा माहौल बना रहता है पर श्रावण व चैत्र के महीने में यह नगरी शिव भक्तों के तप, दर्शन व धार्मिक जयकारों से शिवमय हो जाती है। सावन माह में शिवभक्तों की अपार भीड़ शिव मन्दिर में उमड़ती है। धार्मिक ग्रन्थों में सावन के सोमवारों का विशेष महत्व होने के चलते यहां भक्तों की इतनी अधिक भीड़ उमड़़ती है कि स्थानीय प्रशासन की सारी सुरक्षा व्यवस्था चरमरा जाती है।   पौराणिक मान्यताओं व धार्मिक अभिलेखों के अनुसार लंका पति रावण ने घोर तपस्या के बाद भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें अपने साथ लंका चलकर वहां वास करने की प्रार्थना की, इस पर भोलेनाथ ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर उसके साथ लंका चलने को राजी हो गए और साथ ही यह शर्त भी रखी कि यदि वह ...

Shrikhand Mahadev:-यहां मां पार्वती के आंसूओं में स्नान करने से होती है यात्रा सफल

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कुल्लू:  हिमाचल प्रदेश के पर्वत शिखरों मणिमहेश, कैलाश, नीलकंठ और श्रीखंड आदि पवित्र स्थानों में प्राकृतिक रूप से झील या सरोवर बने हुए हैं। इनमें स्नान करके श्रद्धालु अपनी यात्रा को सफल मानते हैं। ऐसी झीलों में नयनसर श्रीखंड महादेव से संबंधित है। किंवदंती के अनुसार श्रीखंड को भगवान शिव का लिंग विग्रह माना जाता है। इनमें से एक नयनसर का अपना ही विशेष महत्व है। श्रीखंड को जाने वाले रास्ते के साथ लगते भीम डवारी के समीप ही नयनसर का पवित्र स्थान आता है।  ऐसे हुआ भस्मासुर का वध माना जाता है कि संकट के समय पार्वती ने भगवान विष्णु का आह्वान किया। भगवान विष्णु ने तुरंत पार्वती का रूप धारण कर भस्मासुर को अपनी ओर आकर्षित किया। पार्वती ने शर्त के मुताबिक भस्मासुर को अपनी ही तरह नृत्य करने को विवश किया। नाचते-नाचते पार्वती रूप में भगवान विष्णु ने अपने सिर पर हाथ फेरा, नकल करते हुए भस्मासुर का हाथ ज्यों ही सिर पर गुजरा उसी क्षण वह भस्म हो गया। ऐसे छोड़ा नागों ने अपना स्थान  कन्या की माता को संदेह होने लगा कि बेटी दूध लेकर कहां जाती है। एक दिन कन्या किसी काम से बाहर गई हुई थी। कन्या की मा...

दुर्गा माँ मन्त्र Durga Maa Mantra

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  दुर्गा माँ मन्त्र -  || ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ || ॐ दुं दुर्गायै नमः  Om Dum Durgayei Namaha  सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ।।  “SARVA MANGALA MAANGALYE SHIVEYSARVAARTH SAADHIKEY, SHARNAYE TRAYAMBAKEY GAURI NAARAAYANI NAMOSTUTEY.”  *  शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यातिहरे देवि नारायण नमोस्तुते।।  “SHARNAAGAT DEENAART PARITRAAN PARAAYANEY, SERVASYARTI HAREY DEVI NAARAAYANI NAMOSTUTEY.”  *  सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वेशक्तिसमन्विते । भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते ।।  “SARVASVAROOPEY SARVESHEY SARVSHAKTI SAMANVIETEY, BHAYEBHYAH TRAAHI NO DEVI DURGE DEVI NAMOSTUTEY.”  *  रोगनशेषानपहंसि तुष्टा। रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।।  त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां। त्वमाश्रिता हृयश्रयतां प्रयान्ति।।  “ROGAAN SHOSHAAN PAHANSITUSHTARUSHTATU KAAMAAN SAKLAAN BHISHTAAN, TVAAM AASHRITAANAAM NA VIPANNARAANAM. TVAAMAASHRITAAHYA SHRAYTAAM PRAYAA...

Maa Chamunda temple, Mehrangarh Fort, Jodhpur-माँ चामुंडा मंदिर, मेहरानगढ़ किला, जोधपुर

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  जोधपुर में मां चामुंडा देवी का सुंदर मंदिर अवस्थित है। 1459 में राव जोधा जी ने इस मंदिर को स्थापित किया था। पहले तो यहां केवल आस-पड़ोस के गांव से ही श्रद्धालु मां के दर्शनों के लिए आते थे लेकिन 1965 के युद्ध उपरांत भक्तों की आस्था और भक्ति मां में बढ़ गई। हुआ यूं की 1965 में जब युद्ध हुआ तो दुश्मन ने जोधपुर पर अपना निशाना साधा। उस समय जोधपुर वासियों के जान और माल पर संकट के बादल मंडराने लगे। तब मां चामुंडा ने चील का रूप धरकर जोधपुर वासियों की रक्षा करी।  मंदिर के पंडित जी का कहना है मां चामुंडा की शक्ति देखने के बाद से लेकर आज की तारिख में विश्व भर से श्रद्धालु यहां आकर नतमस्तक होते हैं। बहुत सी विश्व प्रसिद्ध हस्तियां यहीं आकर अपने मांगलिक कार्य पूर्ण करती हैं। यहां के स्थानिय लोग आज से लगभग 550 वर्ष पूर्व मां चामुंडा देवी को मंडोर के परिहारों की कुल देवी के रूप में पूजते थे। जब जोधपुर की बुनियाद रखी गई तो मेहरानगढ़ की पहाड़ी पर मंदिर को स्थापित किया गया। जोधपुर के राजघराने की इष्ट देवी के रूप में मां का पूजन किया जाता है। मां चामुंडा देवी का  है. इस इलाके में ...

Brahma Temple, Pushkar, Rajasthan-ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर, राजस्थान

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  पुष्कर   राजस्थान  में विख्यात  तीर्थस्थान  है जहाँ प्रतिवर्ष प्रसिद्ध 'पुष्कर मेला' लगता है। यह राजस्थान के अजमेर जिले में है। यहाँ  ब्रह्मा  का एक मन्दिर है। पुष्कर  अजमेर शहर से १४ की.मी दूरी पर स्थित है। भारत  के  राजस्थान  राज्य में  अरावली श्रेणी  की घाटी में अजमेर नगर से पाँच मील पश्चिम अजमेर जिले का एक नगर तथा स्थानीय मंडी है। इसके निकटवर्ती क्षेत्र में ज्वार, बाजरा, मक्का, गेहूँ तथा गन्ने की उपज होती है। कलापूर्ण कुटीर-वस्त्र-उद्योग, काष्ठ चित्रकला, तथा पशुओं के व्यापार के लिए यह विख्यात है। यहाँ पवित्र  पुष्कर झील  है तथा समीप में ब्रह्मा जी का पवित्र मंदिर है, जिससे प्रति वर्ष अनेक तीर्थयात्री यहाँ आते हैं। अक्टूबर, नवंबर के महीनों में यहाँ एक विशेष धार्मिक एवं व्यापारिक महत्व का मेला लगता है। इसका धार्मिक महत्व अधिक है। यह सागरतल से २,३८९ फुट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो  औरंगजेब  द्वारा ध्वस्त करने के बाद पुन: निर्मित किए गए हैं। इतिहास पुष्कर के उद्भव का वर्णन...

Shree Siddhivinayak Ganapati Temple at Prabhadevi in Mumbai-मुंबई के प्रभादेवी में श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर।

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भगवान श्री गणेश के आठ पवित्र मंदिर महाराष्ट्र के पुणे के समीप स्थित है। इसी अष्टविनायक यात्रा का एक पड़ाव श्री सिद्धविनायक गणेश मंदिर है। यह महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले की करजत तहसील के दूरस्थ गांव सिद्धटेक में स्थित है। सिद्धटेक भीमा नदी के किनारे बसा है। नदी का प्रवाह दक्षिणामुखी है। एक रोचक बात यह है कि यह स्थान बहुत शांत क्षेत्र है। इसका प्रमाण इस बात से मिलता है कि यहां भीमा नदी तेज गति से प्रवाहित होती है, परंतु उसका कोई शोर नहीं होता। यहां श्री सिद्धविनायक गणेश सिद्धी देने वाले बलशाली देवता के रुप में प्रसिद्ध हैं। मंदिर और प्रतिमा - अष्टविनायक गणेश में श्री सिद्धी विनायक मंदिर उत्तरामुखी होकर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर में श्री सिद्धविनायक गणेश की स्वयंभु प्रतिमा विराजित है। यह स्थान 5 फिट ऊंचा और 10 फीट लंबा है। सिद्धीविनायक प्रतिमा के आस-पास जय और विजय की कांसे से बनी मूर्ति भी विराजित है। मंदिर में ही शिव परिवार का छोटा सा मंदिर है। प्रतिमा जाग्रत मानी जाती है। यह तीन फीट ऊंची है और ढाई फीट चौड़ी है। श्री सिद्धीविनायक की सूंड दाएं ओर मुड़ी हुई है। दांए सूंड वाली गणेश प्रत...